जैन धर्म क्या है , जैन धर्म का इतिहास,सिद्धांत और ग्रंथ के बारे में।
जैन धर्म से एसएससी, आरआरबी तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत से प्रश्न पूछें जाते हैं
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जैन धर्म क्या है (What is Jainism) :
जैन धर्म एक प्राचीन धर्म और दर्शन है जो अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य और ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों पर आधारित है। यह धर्म मुख्य रूप से भारत में प्रचलित है और इसका मुख्य उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति है। जैन धर्म के अनुयायी महावीर स्वामी को 24वें तीर्थंकर के रूप में मानते हैं, जिन्होंने इस धर्म के प्रमुख सिद्धांतों का विस्तार किया।
जैन धर्म का इतिहास : जैन धर्म क्या है
जैन धर्म की उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन मानी जाती है। यह वेदों से भी पुराना धर्म माना जाता है। जैन परंपरा के अनुसार, इस धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव थे, जिन्होंने समाज को व्यवस्थित जीवन जीने की शिक्षा दी। 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर (599-527 ईसा पूर्व) ने जैन धर्म के सिद्धांतों को व्यापक रूप से प्रचारित किया और अनुयायियों को अहिंसा और तपस्या का मार्ग दिखाया।
जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत (Main principles of Jainism) : जैन धर्म क्या है
1. अहिंसा (Non-violence):- जैन धर्म क्या है
धर्म में अहिंसा को सर्वोपरि माना गया है। इसका अर्थ है किसी भी प्राणी को शारीरिक, मानसिक या वाणी से हानि न पहुँचाना।
2. सत्य (Truthfulness):-
सत्य बोलना और किसी भी प्रकार के झूठ से बचना जैन धर्म का महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
3. अचौर्य (Non-stealing):-
बिना अनुमति किसी वस्तु का ग्रहण न करना जैन धर्म का एक प्रमुख नियम है।
4. ब्रह्मचर्य (Celibacy):-
आत्मसंयम और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना जैन साधुओं के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
5. अपरिग्रह (Non-possession):-
सांसारिक मोह-माया से दूर रहना और आवश्यकता से अधिक धन, वस्त्र या भौतिक सुखों का संग्रह न करना जैन धर्म में विशेष रूप से बताया गया है।
जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथ (Major texts of Jainism) :
जैन धर्म के प्रमुख ग्रंथों को ‘आगम’ कहा जाता है। ये ग्रंथ मुख्य रूप से भगवान महावीर के उपदेशों पर आधारित हैं। दो प्रमुख जैन संप्रदाय – दिगंबर और श्वेतांबर – इन ग्रंथों की अपनी-अपनी व्याख्या करते हैं।
जैन धर्म में पूजा और साधना :
जैन धर्म में मंदिरों में भगवान महावीर और अन्य तीर्थंकरों की मूर्तियों की पूजा की जाती है। जैन साधु-साध्वियाँ कठोर तपस्या और ध्यान करते हैं। जैन धर्म में 12 व्रतों का पालन करने की परंपरा भी है, जिनमें से अणुव्रत, महाव्रत, संलेखना आदि विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
उपसंहार (Conclusion) :
जैन धर्म क्या है,जैन धर्म न केवल एक धार्मिक पंथ है बल्कि यह एक नैतिक और आध्यात्मिक जीवन जीने का मार्ग भी प्रदान करता है। इसकी शिक्षाएँ अहिंसा, करुणा, और आत्मसंयम पर आधारित हैं, जो न केवल व्यक्ति के आत्मिक उत्थान में सहायक हैं, बल्कि संपूर्ण समाज के कल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
जैन धर्म क्या है