मौर्य वंश की संपूर्ण जानकारी हिंदी में | 3 Great Rulers of Mourya Dynasty

हेलो दोस्तों इस आर्टिकल में मौर्य वंश की संपूर्ण जानकारी हिंदी में दी गई है जैसे कि मौर्य वंश का उदय, मौर्य वंश के प्रमुख शासक एवं उनका योगदान तथा मौर्य वंश की प्रशासनिक स्थिति के बारे में विस्तार से समझाया गया है।

मौर्य वंश की संपूर्ण जानकारी हिंदी में

मौर्य वंश की संपूर्ण जानकारी हिंदी में —

मौर्य वंश का उदय

मौर्य वंश की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश के अंतिम शासक घनानंद को हराकर, 322 ईसा पूर्व में मौर्य वंश की स्थापना की।

★मौर्य वंश का उदय लौह युग में हुआ था।

★चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य के मार्गदर्शन में नंद वंश को हराया था।

★मौर्य वंश भारतीय उपमहाद्वीप का पहला सबसे बड़ा वंश था।

मौर्य वंश के प्रमुख शासक एवं उनका योगदान

मौर्य साम्राज्य का संस्थापक था।

चंद्रगुप्त का जन्म 345 ई. पू. में हुआ था।

चंद्रगुप्त ने 321 – 297 ई पू तक शासन किया।

चंद्रगुप्त ने सेल्युकस को पराजित किया था।

सेल्युकस ने अपनी बेटी (हेलेना) की शादी चंद्रगुप्त से की और अपने राजदूत मेगास्थनीज को चंद्रगुप्त के दरबार में भेजा, जिसने इंडिका नामक पुस्तक लिखी।

चंद्रगुप्त ने जैन धर्म को अपनाकर संन्यास ग्रहण ले लिया।

बिन्दुसार का जन्म लगभग 320 ई पू में पाटलिपुत्र में हुआ था।

बिन्दुसार चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था।

बिन्दुसार का शासकाल 297- 273 ई पू तक रहा।

See also  आधुनिक इतिहास के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर | Modern History Questions & Answers in Hindi Best Top 15

बिन्दुसार को अमित्रघात, सिंहसेन,अजातशत्रु वरिसार और मद्रसार भी कहा जाता है।

बिन्दुसार को महान पिता का पुत्र और महान पुत्र का पिता भी कहते हैं।

अशोक का जन्म पाटलिपुत्र में हुआ था।

अशोक बिन्दुसार और रानी सुभांद्रगी के पुत्र थे।

अशोक ने 269 – 232 ई पू तक शासन किया।

अशोक के शासनकाल में ही कलिंग युद्ध हुआ था जो अशोक के जीवन में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ लाया।

कलिंग युद्ध 261 ई पू में हुआ था।

कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाया।

अशोक ने “देवानाम्पिय पियदस्सी” की उपाधि धारण की।

मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था

मौर्य शासन के केन्द्रीय प्रशासन मे सम्राट का पद सर्वोच्च होता था उसके पास असीमित शक्तियां थी और वह धर्म तथा प्रजा के हिट के लिए कार्य करता था। सम्राट मंत्रिपरिषद की सहायता से कार्य करता था और इस मंत्रिपरिषद का उच्च अधिकारी मंत्री होता था।

केन्द्रीय प्रशासन की देखरेख के लिए विभिन्न अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी जैसे –

समाहकर्ता : यह राजस्व संग्रहण का महत्वपूर्ण कार्यकारी अधिकारी होता था जो सभी के प्रकार के स्रोतों से आने वाले कर (राजस्व) पर निगरानी रखता था।

दंडपाल : दंडपाल न्याय और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का कार्य करता था यह किसी भी दोषी को उसने जो दोष किया है उसके अनुसार ही सजा देता था।

See also  Ancient History Questions Answers in hindi Free 100+: प्राचीन इतिहास के महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर हिन्दी में।

पौर अधिकारी : नगर प्रशासन के प्रमुख को पौर अधिकारी कहा जाता था।

संधासंग्रहिक : मौर्य प्रशासन मे संधासंग्रहिक खजाने का प्रमुख अधिकारी होता था।

मौर्य वंश का प्रांतीय प्रशासन काफी सुव्यवस्थित था प्रत्येक प्रांत की अपनी राजधानी होती थी और हर प्रांत के लिए प्रमुख चुना जाता था जिसे कुमार या आयुत्र कहते थे। जिन्हे कुमार या आयुत्र चुना जाता था वे लोग सम्राट के रिश्तेदार ही होते थे।

मौर्य साम्राज्य को चार प्रमुख प्रांतों मे बांटा गया था –

1. पूर्वी प्रांत (तोषली)

2. पश्चिमी प्रांत (उज्जैन)

3. उत्तरी प्रांत (पाटलिपुत्र)

4. दक्षिणी प्रांत (सुवर्णगिरी)

यह एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली विभाग था। जो राजा को सम्राज्य से से जुड़ी जानकारी प्रदान करता था। गुप्तचर विभाग में कई गुप्तचर होते थे ये गुप्तचर महामात्यपर्सप के अधीन कार्य करते थे।

गरीबों की तरह और फटे पुराने कपड़े पहन कर साम्राज्य में घूमने वाले गुप्तचर को वैदेहक कहा जाता था।

जो गुप्तचर छात्रों की वेशभूषा में रहकर अपना काम करते थे उन्हें कापटिक कहते थे।

कुछ गुप्तचर स्त्रियां भी होती थीं जो परिबृजिका या भिक्षुणी के रूप में रहती थीं।

गुप्तचर विभाग पूरी गोपनीयता के साथ कार्य करता था

मौर्य वंश की संपूर्ण जानकारी हिंदी में अगर यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो शेयर अवश्य करें ।

Scroll to Top