NGT (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) क्या है? स्थापना, संरचना, शक्तियां एवं कार्य | सम्पूर्ण जानकारी

National Green Tribunal (NGT) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी इस आर्टिकल में दी गई है इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण PYQ और MCQ भी दिए गए हैं, जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के बारे में

NGT क्या है?

NGT (National Green Tribunal) अर्थात राष्ट्रीय हरित अधिकरण एक विशेष न्यायाधिकरण (Special Tribunal) है, जिसकी स्थापना पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विवादों का शीघ्र समाधान करने के लिए की गई है।

इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर कानूनी कार्रवाई करना तथा प्रभावित लोगों को शीघ्र न्याय दिलाना है।

यह पारंपरिक अदालतों की तुलना में पर्यावरण संबंधी मामलों का अपेक्षाकृत तेज़ी से निपटारा करता है।

महत्वपूर्ण तथ्य:
NGT एक सिविल न्यायालय नहीं है, बल्कि पर्यावरण मामलों के लिए बनाया गया विशेष न्यायाधिकरण है।

NGT की स्थापना कब हुई?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 (National Green Tribunal Act, 2010) के अंतर्गत की गई।

विवरणजानकारी
पूरा नामNational Green Tribunal (राष्ट्रीय हरित अधिकरण)
स्थापना18 अक्टूबर 2010
अधिनियमNational Green Tribunal Act, 2010
मुख्यालयनई दिल्ली
उद्देश्यपर्यावरणीय मामलों का जल्दी निपटारा

NGT की स्थापना की आवश्यकता क्यों पड़ी?

पहले पर्यावरण से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य न्यायालयों में होती थी, जिससे मामलों के निपटारे में कई वर्ष लग जाते थे।

इसकी स्थापना निम्नलिखित कारणों से आवश्यक हुई—

  • पर्यावरण संबंधी मामलों का शीघ्र निपटारा
  • प्रदूषण नियंत्रण को प्रभावी बनाना
  • पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना
  • प्रभावित नागरिकों को शीघ्र राहत देना
  • सतत विकास (Sustainable Development) को बढ़ावा देना

इस प्रकार NGT ने पर्यावरणीय न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया।

NGT की संरचना

राष्ट्रीय हरित अधिकरण में न्यायिक तथा विशेषज्ञ दोनों प्रकार के सदस्य शामिल होते हैं।

इसमें सामान्यतः निम्न पद होते हैं—

  • अध्यक्ष (Chairperson)
  • न्यायिक सदस्य (Judicial Members)
  • विशेषज्ञ सदस्य (Expert Members)

1 अध्यक्ष और 20 अन्य सदस्य (10 न्यायिक सदस्य + 10 विशेषज्ञ सदस्य)।
विशेषज्ञ सदस्य पर्यावरण विज्ञान, वन, जल, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन तथा संबंधित क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञ होते हैं।

NGT की प्रमुख शाखाएं

इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है, जबकि देश के विभिन्न क्षेत्रों में इसकी क्षेत्रीय शाखाएं भी स्थापित की गई हैं।
इसकी मुख्य शाखा नई दिल्ली में है,
जबकि अन्य क्षेत्रीय शाखाएं भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई में है।
इन शाखाओं के माध्यम से देशभर के पर्यावरणीय मामलों की सुनवाई की जाती है।

NGT के प्रमुख कार्य

राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
1. पर्यावरण संबंधी विवादों का निपटारा
2. प्रदूषण नियंत्रण
3. पर्यावरणीय क्षति का मुआवजा
4. पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करना
5. सतत विकास को बढ़ावा देना

NGT किन कानूनों के अंतर्गत कार्य करता है?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कानूनों के अंतर्गत मामलों की सुनवाई करता है।
इनमें प्रमुख हैं—

  • जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974
  • जल उपकर अधिनियम, 1977 (जहाँ लागू ऐतिहासिक संदर्भ में)
  • वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980
  • वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  • जैव विविधता अधिनियम, 2002

इन्हीं कानूनों के अंतर्गत आने वाले मामलों पर NGT निर्णय देता है।

NGT की शक्तियां

राष्ट्रीय हरित अधिकरण को कई महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त हैं।

  • पर्यावरणीय मामलों की सुनवाई करना
  • परियोजनाओं पर रोक लगाने का आदेश देना
  • प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगाना
  • पर्यावरण बहाली (Restoration) का आदेश देना
  • प्रभावित लोगों को मुआवजा दिलाना
  • पर्यावरणीय नियमों के पालन की निगरानी करना

इसका उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पर्यावरण की पुनर्स्थापना सुनिश्चित करना भी है।

NGT और सर्वोच्च न्यायालय में अंतर

आधारराष्ट्रीय हरित अधिकरणसर्वोच्च न्यायालय
कार्यक्षेत्रकेवल पर्यावरण संबंधी मामलेसभी प्रकार के संवैधानिक एवं कानूनी मामले
स्थापनाNGT Act, 2010भारतीय संविधान
विशेषज्ञ सदस्यहोते हैंनहीं
उद्देश्यत्वरित पर्यावरणीय न्यायसर्वोच्च न्यायिक संस्था
मुख्यालयनई दिल्लीनई दिल्ली

NGT का महत्व

आज पर्यावरण संरक्षण पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यह —

  • पर्यावरण संरक्षण को मजबूत बनाता है।
  • विकास और पर्यावरण में संतुलन स्थापित करता है।
  • नागरिकों के पर्यावरणीय अधिकारों की रक्षा करता है।
  • सरकार और उद्योगों को पर्यावरणीय नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है।
  • पर्यावरणीय न्याय को अधिक सुलभ बनाता है।

इससे संबंधित कुछ महत्वपूर्ण PYQ और MCQ

Q.NGT कब स्थापित किया गया था?

A. 1972 
B. 1995 
C. 2002
D. 2010

✅D. 2010

Q.एनजीटी के वर्तमान अध्यक्ष कौन है?

A. वी.आर. सुब्रमण्यम 
B. सुमन बेरी 
C. प्रकाश श्रीवास्तव 
D. लोकेश्वर सिंह पंत 

✅C. प्रकाश श्रीवास्तव 

Q.राष्ट्रीय हरित अधिकरण के अध्यक्ष _____ के लिए पद धारण करते हैं?

A. 3 वर्ष 
B. 4 वर्ष 
C. 5 वर्ष 
D. 6 वर्ष 

✅C. 5 वर्ष 

Q.NGT की फुल फॉर्म क्या है?

A. National Goods Tax
B. National Grade Test
C. National Grid Terminal
D. National Green Tribunal 

✅D. National Green Tribunal 

किस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना की गई थी?

A. वाब संरक्षण अधिनियम 1982 
B. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 
C. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 
D. समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976

✅B. राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 

Q.राष्ट्रीय हरित अधिकरण का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

A. उत्तराखंड
B. कर्नाटक 
C. नई दिल्ली 
D. गुजरात 

✅C. नई दिल्ली 

Q.कौन सा कथन NGT के उद्देश्य को सही रूप से दर्शाता है?

A. जल का प्रबंधन करना 
B. वन्यजीवों का संरक्षण करना 
C. वनों में रहने वाले जीव जंतुओं की देखभाल 
D. पर्यावरण से संबंधित मामलों का तुरंत निपटारा 

✅D. पर्यावरण से संबंधित मामलों का तुरंत निपटारा 

Q.राष्ट्रीय हरित अधिकरण में किस तरह के सदस्य होते हैं? 

A. प्रशासनिक सदस्य 
B. न्यायिक सदस्य 
C. पार्यवरण से संबंधित विशेषज्ञ सदस्य 
D. B और C दोनों सही हैं

✅D. B और C दोनों सही हैं

Q.NGT के संबंध में अपील कहाँ की जा सकती है?

A. उच्च न्यायालय में 
B. सर्वोच्च न्यायालय 
C. लोकसभा में 
D. राज्यसभा में 

✅B. सर्वोच्च न्यायालय 

Q.क्या राष्ट्रीय हरित अधिकरण का निर्णय बाध्यकारी होता है?

A. हाँ 
B. नहीं 
C. कभी कभी 
D. इनमें से कोई नहीं 

✅A. हाँ 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न FAQs

इसका का पूरा नाम National Green Tribunal (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को हुई।

इसकी स्थापना National Green Tribunal Act, 2010 के अंतर्गत की गई।

इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों का त्वरित निपटारा करना तथा पर्यावरणीय न्याय सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष

राष्ट्रीय हरित अधिकरण भारत की पर्यावरणीय न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह केवल पर्यावरण संबंधी विवादों का समाधान करने वाला न्यायाधिकरण नहीं है, बल्कि सतत विकास, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और नागरिकों के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार की रक्षा करने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था भी है। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए इसकी भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। 

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