भारतीय इतिहास को मुख्य रूप से प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक इतिहास में समझा जाता है। नीचे दिए गए अनुभागों से आप अपनी आवश्यकता के अनुसार संबंधित इतिहास के महत्वपूर्ण प्रश्न, तथ्य और अध्ययन सामग्री पढ़ सकते हैं।

प्राचीन इतिहास के पिछले वर्षों में पूछे गए सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर विस्तृत व्याख्या सहित।

मध्यकालीन इतिहास के पिछले वर्षों में पूछे गए सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर विस्तृत व्याख्या सहित।

आधुनिक इतिहास के पिछले वर्षों में पूछे गए सभी महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर विस्तृत व्याख्या सहित।

प्राचीन भारतीय इतिहास
सिंधु घाटी सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी नगरीय सभ्यताओं में से एक है। इसका युग लगभग 2500 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व तक माना जाता है।
इसके प्रमुख नगर – हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलागीरा और राखीगढ़ी आदि हैं।
इसकी खोज 1920 के दशक में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा की गई थी।
नगर नियोजन और जल निकासी की व्यवस्था यहाँ की प्रमुख विशेषताएं हैं।
मोहनजोदड़ो से कांसे की नर्तकी और अन्नागार के साक्ष्य मिले हैं।
हड़प्पा नगर भारत में स्थित सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है।
लोथल से बंदरगाह के प्रमाण मिले हैं जिससे यह पता चलता है समुद्री मार्ग द्वारा विदेशों से व्यापार होता था……..और अधिक पढ़ें।
वैदिक काल
वैदिक काल भारत के इतिहास का वह युग था जिसमें वेदों की रचना की गई थी। इन्हीं वेदों को हिन्दू धर्म में सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ माना गया है। वैदिक काल समय 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व तक माना गया है।
यह युग प्राचीन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण चरण है।
वैदिक काल का विभाजन दो भागों में किया गया था ऋग्वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल।
इसी काल में आर्यों का जीवन विकसित हुआ था।
यह एक ग्रामीण सभ्यता थी….और अधिक पढ़ें।
महाजनपद काल
महाजनपद काल का समय प्राचीन भारतीय इतिहास का द्वितीय नगरीकरण का युग था। यह 600 ईसा पूर्व से 325 ईसा पूर्व समय था जब बहुत से छोटे छोटे जनपद मिलकर बड़े बड़े राज्यों बदल गए थे जिनसे महाजनपदों का उदय हुआ था इनकी संख्या 16 थी। इन महाजनपदों मे एक मगध था, जो सभी 16 महाजनपदों सबसे अधिक शक्तिशाली था।
बौद्ध धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय और जैन धर्म के ग्रंथ भगवती सूत्र से इन 16 महाजनपदों के बारे में जानकारी मिलती है ….और अधिक पढ़े।
मौर्य साम्राज्य
मौर्य साम्राज्य प्राचीन भारत का सबसे शक्तिशाली साम्राज्य था इस वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में चाणक्य की सहायता से नन्द वंश के अंतिम शासक घनानन्द को पराजित करके साम्राज्य को स्थापित किया था। चन्द्रगुप्त मौर्य जैन धर्म का अनुयायी था और उसने संलेखना विधि के द्वारा अपने प्राणों का त्याग किया था।
चन्द्रगुप्त मौर्य का प्रधानमंत्री चाणक्य था, जिसने मौर्य प्रशासन पर आधारित पुस्तक “अर्थशास्त्र” की रचना की थी। चाणक्य को कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है।
चन्द्रगुप्त मौर्य का सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर से 304-305 ईसा पूर्व के मध्य एक युद्ध हुआ था जिसमे चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को पराजित किया था।
सेल्यूकस ने अपने दूत मेगास्थनीज को चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा, जिसने “इंडिका” नामक पुस्तक की रचना की …..और अधिक पढ़ें।
गुप्त साम्राज्य
गुप्त वंश के काल को भारतीय इतिहास का स्वर्णयुग कहा जाता है इसका समय 240 से 550 ईसा पूर्व था। इसी समय में कुमारगुप्त ने नालंदा विश्वविधालय का निर्माण कराया था जो, भारत के सबसे प्राचीन विश्वविधालयों में से एक है।
इस वंश का संस्थापक श्रीगुप्त था। जबकि वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त प्रथम को माना जाता है।
श्रीगुप्त के बाद घटोत्कच राजा बनता है और उसके पश्चात उसका पुत्र चन्द्रगुप्त प्रथम राजा बनता है।
चन्द्रगुप्त प्रथम का राज्याभिषेक 319-320 ईसा पूर्व मे हुआ था जिसके उपलक्ष्य उसने गुप्त संवत की शुरुआत की थी…..और अधिक पढ़ें।
मध्यकालीन भारतीय इतिहास
दिल्ली सल्तनत
दिल्ली सल्तनत का समय 1206 से 1526 ई.वी. तक था। इस सल्तनत की स्थापना मुहम्मद गौरी के सेनापति कुतुबउद्दीन ऐबक ने की थी। कुतुबउद्दीन ऐबक ने ही दिल्ली में कुतुबमीनार का निर्माण शुरू कराया था जिसे इल्तुतमिश द्वारा पूर्ण कराया गया था। दिल्ली सल्तनत के अंतर्गत पाँच वंश (गुलाम वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश, सैय्यद वंश और लोदी वंश) ने बारी बारी से शासन किया था।
मुगल साम्राज्य
मुगल साम्राज्य के शासन का समय 1526 से 1857 ईस्वी तक माना जाता है। जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर ने 21 अप्रैल 1526 को पानीपत के प्रथम युद्ध में लोदी वंश के शासक इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल साम्राज्य को स्थापित किया। बाबर एक कुशल सेनापति होने के साथ साथ एक लेखक भी था जिसने तुजुक-ए-बाबरी (बाबरनामा) की रचना की थी। इसी वंश के शासक शाहजहाँ ने विश्व प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण कराया था।
भक्ति और सूफी आंदोलन
भारत के मध्यकालीन इतिहास में भक्ति आंदोलन और सूफी आंदोलन प्रमुख धार्मिक और सामाजिक सुधार आंदोलन थे।
भक्ति आंदोलन की शुरुआत 7 वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में अलवार और नयनार संतों ने की थी 12 शताब्दी में आने तक यह आंदोलन पूरे उत्तर भारत में फैल चुका था। कबीरदास, तुलसीदास, सूरदास, रामानुज और मीराबाई भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे।
सूफी आंदोलन 8 वीं शताब्दी में प्रारंभ हुआ था सामाजिक भेदभाव का विरोध, जाति व्यवस्था का विरोध करना और आपसी भाईचारे को बढ़ाना दोनों आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य था।
मराठा साम्राज्य
मराठा साम्राज्य की स्थापना 17 वीं शताब्दी में छत्रपती शिवाजी महाराज ने की थी। इस साम्राज्य की राजधानी रायगढ़ थी। शिवाजी महाराज का जन्म 1630 ईस्वी में शिवनेरी के किले में हुआ था इनके पिता शाहजी भोसले और माता जीजाबाई थीं। इनका राज्यभिषेक 1674 ईस्वी में रायगढ़ के किले में हुआ था इन्हें ‘रायपिथौरा’ के नाम से भी जाना जाता है।
इन्होंने आठ मंत्रियों की परिषद बनाई जिसे ‘अष्टप्रधान’ कहा गया।
इन्होंने चौथ कर और सरदेशमुखी कर का प्रारंभ किया।
आधुनिक भारतीय इतिहास
ब्रिटिश शासन की शुरुआत
भारत में ब्रिटिश शासन की शुरुआत 1757 में हुए प्लासी के युद्ध से मानी जाती है यह युद्ध ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से राबर्ट क्लाइव और सिराज-उद-दौला के सेनापति मीरजाफर के बीच लड़ा गया। इस युद्ध मे सिराज-उद-दौला के सेनापति मीरजाफर ने उसके साथ विश्वाशघात किया था वह अंग्रेजों से मिल गया था जिस कारण उसने सेना का संचालन सही ढंग से नहीं किया और रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व ईस्ट इंडिया कंपनी की विजय हुई।
1764 ईस्वी में हुए बक्सर के युद्ध से ईस्ट इंडिया कंपनी की जड़े और मजबूत हो गई। यह युद्ध ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से हेक्टर मुनरो और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय, अवध नवाब शुजा-उद-दौला, मीरकासिम की संयुक्त सेना के बीच हुआ था इस युद्ध में भी कंपनी की विजय हुई।
▣प्लासी का युद्ध 1757
▣बक्सर का युद्ध 1764
1857 की क्रांति का विद्रोह
1857 की क्रांति को ‘भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ भी कहा जाता है। यह विद्रोह अंग्रेजों (ईस्ट इंडिया कंपनी) के विरूद्ध था। यह क्रांति 10 मई 1857 को मेरठ से प्रारंभ हुई थी।
इसका प्रमुख करण हैं –
कारतूसों में गाय की चर्बी का प्रयोग।
लॉर्ड डलहौजी की हड़प नीति।
किसानों से अधिक कर लेना।
अधिक मात्रा में नील की खेती कराना आदि।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन 1857 से लेकर 1947 तक चलते रहे ये आंदोलन कई चरणों में हुए और तब तक अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते रहे जब तक स्वतंत्रता को प्राप्त नहीं कर लिया इसमें भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस की स्थापना और महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय और बालगंगाधर तिलक आदि के आंदोलन तथा स्वदेशी आंदोलन प्रमुख रूप से शामिल हैं।
▣ भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना 1885
▣ मुस्लिम लीग की स्थापना 1906
▣ होमरुल आंदोलन 1916
महात्मा गांधी के प्रमुख आंदोलन:
▣ चंपारण आंदोलन 1917
▣ खेड़ा आंदोलन 1918
▣ खिलाफत आंदोलन 1919
▣ असहयोग आंदोलन 1920
▣ दांडी मार्च / नमक सत्याग्रह 1930
▣ सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930
▣ भारत छोड़ो आंदोलन 1942
सामाजिक एवं राजनैतिक समझौते, योजनाएं एवं प्रस्ताव
▣ पूना पैक्ट
▣ गांधी-इरविन समझौता
▣ वेवेल योजना
▣ माउंटबेटन योजना
▣ क्रिप्स् मिशन
▣ कैबिनेट मिशन
भारत का विभाजन
भारत की स्वतंत्रता और विभाजन इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। हमारा भारत 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजाद हुआ था लेकिन इसके साथ ही भारत सरकार अधिनियम 1935 के द्वारा भारत और पाकिस्तान का विभाजन भी हुआ था। यह विभाजन मुख्यत हिन्दू – मुस्लिम धर्म को आधार बनाकर किया गया था।
निष्कर्ष
भारतीय इतिहास केवल राजाओं और युद्धों की जानकारी तक सीमित नहीं है। इसमें भारत की सभ्यता, समाज, संस्कृति, धर्म, अर्थव्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था और स्वतंत्रता संघर्ष जैसे अनेक पहलू शामिल हैं।
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