दिल्ली सल्तनत | Delhi Saltnat MCQ in Hindi Best Questions [21 -40]

Delhi Saltnat MCQ in Hindi – इस आर्टिकल में दिल्ली सल्तनत की सम्पूर्ण जानकारी MCQ और उनके महत्वपूर्ण Explanation द्वारा दी गई है, जो सभी Competitive Exams के लिए आवस्यक है। 

Delhi Saltnat MCQ in Hindi

Delhi Saltnat MCQ in Hindi | Q21 - 40

कुतुबुद्दीन ऐबक के बाद दिल्ली की सत्ता पर कुछ समय के लिए किसने शासन किया?

A. इल्तुतमिश
B. आरामशाह
C. रुक्नुद्दीन फिरोज
D. नासिरुद्दीन महमूद

✅B. आरामशाह
  • कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद आरामशाह को दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया।ऐबक की तुलना में आरामशाह राजनीतिक रूप से कमजोर था।
  • उसका शासन बहुत अल्पकालिक रहा और उसे तुर्क अमीरों का समर्थन प्राप्त नहीं था।

इल्तुतमिश को दिल्ली की सत्ता प्राप्त करने में किसकी प्रमुख सहायता मिली?

A. मंगोल सरदारों की
B. दिल्ली के तुर्क अमीरों की
C. राजपूत शासकों की
D. दक्षिण भारतीय राज्यों की

✅B. दिल्ली के तुर्क अमीरों की
  • आरामशाह के राजनैतिक रूप से कमजोर होने के कारण तुर्क अमीरों ने उपयुक्त शासक की तलाश की।
  • इल्तुतमिश पहले से ही बदायूँ का महत्वपूर्ण शासक था।
  • उसकी सैन्य क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के कारण उसे दिल्ली की सत्ता के लिए उपयुक्त माना गया।
  • उसने आरामशाह को हटाकर दिल्ली पर अपना नियंत्रण स्थापित किया।

इल्तुतमिश ने बंगाल में अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए किस प्रकार की नीति अपनाई?

A. बंगाल को पूरी तरह स्वतंत्र छोड़ दिया
B. बंगाल पर मंगोलों को अधिकार दिया
C. बंगाल को विजयनगर को सौंप दिया
D. विद्रोही शासकों के विरुद्ध सैन्य अभियान चलाए

✅D. विद्रोही शासकों के विरुद्ध सैन्य अभियान चलाए
  • बंगाल एक दूरस्थ और बार-बार विद्रोह करने वाला क्षेत्र था।
  • इल्तुतमिश ने सैन्य अभियानों के माध्यम से बंगाल पर केंद्रीय प्रभाव पुनः स्थापित किया।

इल्तुतमिश के शासनकाल में मंगोल खतरे का संबंध मुख्यतः किस मध्य एशियाई शासक से था?

A. चंगेज खान
B. तैमूर
C. बाबर
D. अबू सईद

✅A. चंगेज खान
  • 13वीं शताब्दी के प्रारंभ में चंगेज खान के नेतृत्व में मंगोल शक्ति तेजी से मध्य एशिया में फैल रही थी।
  • ख्वारिज्म के शासक जलालुद्दीन मंगबर्नी मंगोलों से संघर्ष करते हुए भारत की सीमा तक पहुँचा।
  • उसके भारत आने से इल्तुतमिश के लिए मंगोलों और जलालुद्दीन के बीच संबंधों को लेकर कूटनीतिक संकट पैदा हुआ।
  • इल्तुतमिश ने सीधे समर्थन देकर मंगोलों को उकसाने के बजाय सावधानीपूर्ण तटस्थता अपनाई।

जलालुद्दीन मंगबर्नी किस साम्राज्य का शासक था?

A. सामानी
B. गजनवी
C. ख्वारिज्म
D. अब्बासी

✅C. ख्वारिज्म
  • जलालुद्दीन मंगबर्नी ख्वारिज्म साम्राज्य का प्रमुख शासक था।
  • मंगोल आक्रमण के कारण उसका साम्राज्य बुरी तरह प्रभावित हुआ।

दिल्ली सल्तनत के संदर्भ में ‘बदायूँ’ का महत्व किस शासक के जीवन से विशेष रूप से जुड़ा था?

A. इल्तुतमिश
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. मुहम्मद बिन तुगलक
D. सिकंदर लोदी

✅A. इल्तुतमिश
  • दिल्ली का सुल्तान बनने से पहले इल्तुतमिश बदायूँ का सूबेदार था।
  • इल्तुतमिश दिल्ली की सत्ता प्राप्त करने के बाद भी बदायूँ सल्तनत के महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों में रहा।

रजिया के शासनकाल में उसका विरोध करने वाले तुर्क अमीरों की प्रमुख समस्या क्या थी?

A. वे मंगोलों का समर्थन करते थे
B. वे दक्षिण भारत जाना चाहते थे
C. वे व्यापार पर नियंत्रण चाहते थे
D. वे महिला शासक के स्वतंत्र राजनीतिक व्यवहार से असहमत थे

✅D. वे महिला शासक के स्वतंत्र राजनीतिक व्यवहार से असहमत थे।
  • रजिया ने स्वयं को केवल नाममात्र की शासक बनाकर रखने के बजाय स्वतंत्र शासक के रूप में नेतृत्व किया।
  • उसने प्रशासन में अपनी पसंद के अधिकारियों को महत्व देने का प्रयास किया।
  • उसके विरुद्ध विरोध केवल उसके महिला होने तक सीमित नहीं था, बल्कि तुर्क अमीरों को अपने प्रभाव में कमी का भी डर था।
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बलबन ने अपने शासन में ‘नायब’ के पद पर रहते हुए _____ का अनुभव प्राप्त किया था?

A. केंद्रीय प्रशासन और शासन संचालन
B. समुद्री व्यापार
C. धार्मिक शिक्षा
D. कृषि सुधार

✅A. केंद्रीय प्रशासन और शासन संचालन
  • सुल्तान बनने से पहले बलबन दिल्ली सल्तनत के शक्तिशाली अमीरों में शामिल था।
  • उसने नासिरुद्दीन महमूद के शासनकाल में नायब के रूप में शासन के वास्तविक संचालन में व्यापक अनुभव प्राप्त किया।
  • इसलिए बलबन का राजनीतिक जीवन केवल उसके सुल्तान बनने के बाद से नहीं समझना चाहिए।

गुलाम वंश का अंतिम शासक कौन था?

A.बलबन 
B.नासिरुद्दीन महमूद 
C.बहराम शाह 
D.क्यूमर्स

✅D.क्यूमर्स
  • कैकूबाद का उत्तराधिकारी उसका पुत्र क्यूमर्स हुआ।
  • क्यूमर्स जब सुल्तान बना तब उसकी आयु मात्र 3 वर्ष थी।
  • क्यूमर्स का संरक्षक जलालउद्दीन खिलजी था जिसने क्यूमर्स को गद्दी से हटा दिया और सत्ता पर अपना अधिकार कर लिया।

खिलजी वंश का संस्थापक कौन था?

A. जलालुद्दीन खिलजी
B. अलाउद्दीन खिलजी
C. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह
D. खुसरो खान

✅A. जलालुद्दीन खिलजी
  • जलालुद्दीन खिलजी ने 1290 ई. में खिलजी वंश की स्थापना की।
  • उसके सत्ता में आने के साथ दिल्ली सल्तनत में ममलूक वंश का अंत हुआ।
  • जलालउद्दीन ने शाहिस्ता खान की उपाधि धारण की।
  • इसने 1290 से 1296 तक शासन किया।

खिलजी वंश के उदय का दिल्ली सल्तनत के इतिहास में क्या महत्व था?

A. सत्ता केवल राजपूतों के हाथ में चली गई
B. शासन में नए तुर्क-अफगान राजनीतिक तत्वों का प्रभाव बढ़ा
C. मुगल साम्राज्य स्थापित हो गया
D. दिल्ली का राजनीतिक महत्व समाप्त हो गया

✅B. शासन में नए तुर्क-अफगान राजनीतिक तत्वों का प्रभाव बढ़ा
  • खिलजी सत्ता के उदय ने पुराने तुर्क कुलीनों को चुनौती दी।
  • खिलजी शासकों ने प्रशासन और सैन्य नेतृत्व में व्यापक राजनीतिक आधार विकसित किया।

जलालुद्दीन खिलजी के शासन की प्रमुख विशेषता क्या थी?

A. अत्यधिक कठोर दंड नीति
B. अपेक्षाकृत उदार एवं समझौतापूर्ण दृष्टिकोण
C. समुद्री साम्राज्य निर्माण
D. दक्षिण भारत से पूर्ण अलगाव

✅B. अपेक्षाकृत उदार एवं समझौतापूर्ण दृष्टिकोण
  • जलालुद्दीन खिलजी अपने शासन में कठोर नीति की तुलना में समझौते और क्षमा की नीति को अधिक महत्व देता था।
  • सकी नीति अलाउद्दीन खिलजी की बाद की कठोर प्रशासनिक शैली से अलग थी।
  • अंततः उसके भतीजे अलाउद्दीन ने उसकी हत्या कर सत्ता प्राप्त की।

अलाउद्दीन खिलजी ने सत्ता प्राप्त करने से पहले किस क्षेत्र का प्रशासन संभाला था?

A. कड़ा
B. बंगाल
C. सिंध
D. मुल्तान

✅A. कड़ा
  • अलाउद्दीन खिलजी को जलालुद्दीन खिलजी के शासन में कड़ा का सूबेदार बनाया गया था।
  • कड़ा वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र था।
  • इसी पद पर रहते हुए उसने देवगिरि पर अभियान चलाया।
  • देवगिरि से प्राप्त विशाल धन ने उसकी राजनीतिक और सैन्य क्षमता बढ़ाई।

अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

A. कम कीमतों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
B. किसानों को स्वतंत्र व्यापार से रोकना मात्र
C. विदेशी व्यापार समाप्त करना
D. केवल विलासिता की वस्तुओं की बिक्री बढ़ाना

✅A. कम कीमतों पर आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
  • अलाउद्दीन को बड़ी और स्थायी सेना बनाए रखने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता थी।
  • उसने बाजार में वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
  • कम कीमतों से सैनिकों को अपेक्षाकृत सीमित वेतन में आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराना आसान हुआ।
  • इसके लिए व्यापारियों, भंडारण और बाजार गतिविधियों पर निगरानी की व्यवस्था की गई।
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अलाउद्दीन खिलजी की राजस्व नीति में ‘खराज’ किससे संबंधित था?

A. भूमि से प्राप्त कर
B. व्यापारिक बंदरगाह कर
C. धार्मिक दान
D. सैनिक वेतन

✅A. भूमि से प्राप्त कर
  • खराज मध्यकालीन राजस्व व्यवस्था में भूमि से संबंधित कर था।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने कृषि राजस्व से राज्य की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
  • उसके शासन में राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से राजस्व संग्रह को व्यवस्थित किया गया।
  • बढ़ी हुई राजस्व आय ने विशाल सेना और सैन्य अभियानों को आर्थिक आधार दिया।

अलाउद्दीन खिलजी के शासन में घोड़ों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कौन-सी व्यवस्था महत्वपूर्ण थी?

A. दाग प्रणाली
B. इक्ता प्रणाली
C. चहलगानी
D. जजिया

✅A. दाग प्रणाली
  • दाग का संबंध घोड़ों को चिह्नित करने की व्यवस्था से था।
  • इसका उद्देश्य सेना में वास्तविक और अच्छी गुणवत्ता वाले घोड़ों की पहचान सुनिश्चित करना था।
  • यह व्यवस्था सैन्य प्रशासन में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी को नियंत्रित करने के प्रयास का हिस्सा थी।
  • अलाउद्दीन की सैन्य नीतियों में सैनिकों और घोड़ों के रिकॉर्ड की निगरानी महत्वपूर्ण थी।

अलाउद्दीन खिलजी की सैन्य व्यवस्था में ‘चेहरा’ किससे संबंधित था?

A. सैनिकों का विवरण/रजिस्टर
B. भूमि का मापन
C. व्यापारियों का लाइसेंस
D. धार्मिक कर का रिकॉर्ड

✅A. सैनिकों का विवरण/रजिस्टर
  • चेहरा सैनिकों का विवरण दर्ज करने वाली व्यवस्था से संबंधित था। इसमें सैनिकों की पहचान से जुड़े विवरणों को दर्ज किया जाता था।
  • दाग और चेहरा दोनों को अलाउद्दीन की सैन्य प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण उपकरणों के रूप में समझा जाता है।

अलाउद्दीन खिलजी ने भूमि राजस्व की दर को सामान्यतः उपज के कितने भाग तक निर्धारित किया था?

A. एक-चौथाई
B. एक-तिहाई
C. आधा
D. दो-तिहाई

✅C. आधा
  • अलाउद्दीन खिलजी ने राज्य की आय बढ़ाने के लिए कृषि राजस्व व्यवस्था में कठोर परिवर्तन किए।
  • उपज का लगभग 50 प्रतिशत राज्य के हिस्से के रूप में निर्धारित किया गया।
  • इतनी ऊँची राजस्व मांग का उद्देश्य राज्य के वित्तीय संसाधनों को मजबूत करना था।

अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए किस विभाग की स्थापना की?

A. दीवान-ए-रियासत
B. दीवान-ए-अर्ज
C. दीवान-ए-वजारत
D. दीवान-ए-इंशा

✅A. दीवान-ए-रियासत
  • दीवान-ए-रियासत बाजार नियंत्रण व्यवस्था का प्रमुख विभाग था।
  • इसके माध्यम से निर्धारित कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों की निगरानी की जाती थी।
  • व्यापारियों के पंजीकरण तथा बाजार नियमों के पालन पर भी नियंत्रण रखा जाता था।

अलाउद्दीन खिलजी की बाजार व्यवस्था में अनाज की कीमतों को नियंत्रित करने का मुख्य कारण क्या था?

A. किसानों की संख्या घटाना
B. सेना को कम वेतन में बनाए रखना
C. विदेशी व्यापार रोकना
D. राजस्व समाप्त करना

✅B. सेना को कम वेतन में बनाए रखना
  • अलाउद्दीन ने बड़ी संख्या में सैनिकों वाली स्थायी
  • सैनिकों को अत्यधिक वेतन दिए बिना उनकी वास्तविक क्रय-शक्ति बनाए रखने के लिए आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कम रखना उपयोगी था।
  • अनाज जैसी मूलभूत वस्तुओं के लिए निश्चित दरें इसी नीति का हिस्सा थीं।

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