मध्यकालीन इतिहास MCQ | Madhyakalin Itihas MCQ in Hindi Best Questions

Madhyakalin Itihas MCQ in Hindi – इस आर्टिकल में मध्यकालीन भारत का प्रारम्भिक चरण एवं तुर्कों का आगमन से संबंधित महत्वपूर्ण MCQ और PYQ दिए गए हैं बेहतरीन Explanation के साथ, जिससे आपका Concept भी Clear होगा। यह MCQ किसी भी Competitive Exams के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। 

Madhyakalin Itihas MCQ in Hindi

Madhyakalin Itihas MCQ in Hindi | Q1 - 20

दिल्ली सल्तनत की स्थापना का श्रेय सामान्यतः किस शासक को दिया जाता है?

A. मुहम्मद गोरी
B. कुतुबुद्दीन ऐबक
C. इल्तुतमिश
D. बलबन

✅B. कुतुबुद्दीन ऐबक
  • मुहम्मद गोरी की मृत्यु के बाद उसके भारतीय क्षेत्रों पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की।
  • ऐबक ने 1206 ई. में दिल्ली सल्तनत के प्रारंभिक शासन की नींव रखी। जो मुहम्मद गोरी का विश्वसनीय सैन्य अधिकारी था।
  • ऐबक के शासन को सामान्यतः गुलाम वंश की शुरुआत माना जाता है।
  • गुलाम वंश को दास वंश, इल्बारी वंश, मामलुक वंश तथा घुरिद वंश के नाम से भी जाना जाता है।

कुतुबुद्दीन ऐबक मूल रूप से किसके अधीन कार्य करता था?

A. महमूद गजनवी
B. मुहम्मद गोरी
C. इल्तुतमिश
D. यामीनुद्दीन महमूद

✅B. मुहम्मद गोरी
  • गोरी ने भारतीय क्षेत्रों के प्रशासन की जिम्मेदारी धीरे-धीरे ऐबक को सौंप दी।
  • 1192 ई. के तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद उत्तर भारत में गोरी की स्थिति मजबूत हुई।
  • गोरी की मृत्यु के बाद ऐबक ने भारतीय क्षेत्र में स्वतंत्र सत्ता कायम की।

तराइन का प्रथम युद्ध किस वर्ष हुआ था?

A. 1191 ई.
B. 1192 ई.
C. 1194 ई.
D. 1206 ई.

✅A. 1191 ई.
  • तराइन का प्रथम युद्ध 1191 ई. में हुआ।
  • इसमें पृथ्वीराज चौहान की सेना का सामना मुहम्मद गोरी से हुआ।
  • इस युद्ध में गोरी को पराजय का सामना करना पड़ा।
  • 1192 में मुहम्मद गौरी ने पुनः आक्रमण किया और विजयी हुआ।

तराइन के द्वितीय युद्ध में मुहम्मद गोरी ने किस शासक को पराजित किया?

A. जयचंद
B. पृथ्वीराज चौहान
C. भोज
D. भीमदेव

✅B. पृथ्वीराज चौहान
  • तराइन का द्वितीय युद्ध 1192 ई. में हुआ।
  • इसमें मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया।
  • इस विजय के बाद उत्तर भारत में गोरी के प्रभाव का विस्तार तेजी से हुआ।

तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद उत्तर भारत में किस शक्ति का प्रभाव तेजी से बढ़ा?

A. चोल
B. तुर्क
C. राष्ट्रकूट
D. पाल

✅B. तुर्क

    1192 ई. के तराइन युद्ध में गोरी की विजय ने उत्तर भारत की राजनीतिक स्थिति बदल दी।

चंदावर का युद्ध किसके बीच हुआ था?

A. पृथ्वीराज चौहान और मुहम्मद गोरी
B. जयचंद और मुहम्मद गोरी
C. राणा सांगा और बाबर
D. इब्राहिम लोदी और बाबर

✅B. जयचंद और मुहम्मद गोरी
  • चंदावर का युद्ध 1194 ई. में हुआ।
  • इसमें मुहम्मद गोरी का सामना कन्नौज के शासक जयचंद से हुआ।
  • इस युद्ध में जयचंद की पराजय हुई।
  • चंदावर का युद्ध तराइन के बाद उत्तरी भारत में तुर्की विस्तार की दूसरी महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।

चंदावर का युद्ध किस नदी के निकट हुआ था?

A. गंगा
B. यमुना
C. चंबल
D. नर्मदा

✅A. गंगा
  • चंदावर वर्तमान उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण मध्यकालीन स्थल था।
  • युद्ध गंगा नदी के निकट हुआ था।
  • यहाँ मुहम्मद गोरी ने कन्नौज के शासक जयचंद को पराजित किया था।
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मुहम्मद गोरी की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?

A. 1192 ई.
B. 1194 ई.
C. 1206 ई.
D. 1210 ई.

✅C. 1206 ई.
  • उसकी मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की।
  • गोरी का कोई स्थायी उत्तराधिकारी नहीं था जो उसके भारतीय क्षेत्रों को सीधे नियंत्रित कर सके।

कुतुबुद्दीन ऐबक को किस उपनाम से जाना जाता है?

A. लाखबख्श
B. जिंदापीर
C. सिकंदर-ए-सानी
D. तुगलक-ए-आज़म

✅A. लाखबख्श
  • कुतुबुद्दीन ऐबक को उसकी उदारता के कारण ‘लाखबख्श’ कहा जाता था।
  • ‘लाखबख्श’ का अर्थ लगभग लाखों का दान देने वाला है।

अजमेर मे अढ़ाई दिन का झोंपड़ा किसके द्वारा बनबाया गया था?

A.इल्तुतमिश 
B.कुतुबउद्दीन ऐबक 
C.अलाउद्दीन खिलजी 
D.बलबन 

✅B.कुतुबउद्दीन ऐबक 
  • अढ़ाई दिन का झोंपड़ा राजस्थान के अजमेर में स्थित है।
  • दिल्ली में कुतुब मीनार और कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का निर्माण भी कुतुबउद्दीन ऐबक द्वारा कराया गया।
  • लेकिन कुतुब मीनार का निर्माण इल्तुतमिश ने पूर्ण किया था।

कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु किस खेल के दौरान हुई थी?

A. चौगान
B. पोलो
C. शतरंज
D. घुड़दौड़

✅A. चौगान
  • कुतुबउद्दीन ने 1206 से 1210 तक शासन किया।
  • 1210 ई.वी. में लाहौर में चौगान खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण उसकी मृत्यु हो गई।।
  • उसके बाद आरामशाह कुछ समय के लिए सत्ता में आया।
  • अंततः इल्तुतमिश ने सत्ता संभाली और सल्तनत को अधिक स्थायित्व प्रदान किया।

इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत को मजबूत करने में किस प्रकार की भूमिका निभाई?

A. उसने बहमनी राज्य की स्थापना की
B. उसने मुगल साम्राज्य की स्थापना की
C. उसने विजयनगर साम्राज्य स्थापित किया
D. उसने सल्तनत का विस्तार और राजनीतिक संगठन मजबूत किया

✅D. उसने सल्तनत का विस्तार और राजनीतिक संगठन मजबूत किया
  • उसने दिल्ली को सत्ता के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत किया।
  • इसलिए उसे दिल्ली सल्तनत के वास्तविक सुदृढ़ीकरण से जुड़े प्रमुख शासक के रूप में देखा जाता है।
  • इसे दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक भी माना जाता है।
  • 1211 ई.वी. मे दिल्ली सल्तनत का शासक बना और 1236 तक शासन किया।

इल्तुतमिश ने किस मुद्रा प्रणाली को व्यवस्थित रूप दिया?

A. रुपया और पैसा
B. टंका और जीतल
C. दीनार और दिरहम
D. मोहर और रुपया

✅B. टंका और जीतल
  • इल्तुतमिश ने दिल्ली सल्तनत की मुद्रा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित किया।
  • चाँदी का टंका उसकी मुद्रा प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
  • जीतल अपेक्षाकृत छोटी मूल्यवर्ग की मुद्रा थी।

दिल्ली सल्तनत में ‘चालीसा’ या ‘चहलगानी’ किससे संबंधित था?

A. 40 विद्वानों का समूह
B. 40 तुर्क अमीरों का समूह
C. 40 सैनिकों की टुकड़ी
D. 40 व्यापारियों का संघ

✅B. 40 तुर्क अमीरों का समूह
  • चहलगानी इल्तुतमिश द्वारा विकसित प्रभावशाली तुर्क अमीरों के समूह से संबंधित था।
  • इसे सामान्यतः ‘चालीसा’ भी कहा जाता है।
  • बलबन ने इसी शक्तिशाली कुलीन वर्ग के प्रभाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

रजिया सुल्तान किस शासक की पुत्री थी?

A. कुतुबुद्दीन ऐबक
B. बलबन 
C. इल्तुतमिश
D. नासिरुद्दीन महमूद

✅C. इल्तुतमिश
  • इल्तुतमिश ने रजिया को अपने योग्य उत्तराधिकारी के रूप में देखा था।
  • रजिया ने 1236 ई. में दिल्ली की सत्ता संभाली।
  • उसने 1236 से 1240 तक दिल्ली पर शासन किया
  • 1240 में कैथल नामक स्थान पर उसकी हत्या कर दी गई।
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दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र प्रमुख महिला सुल्तान के रूप में किसे जाना जाता है?

A. नूरजहाँ
B. रजिया
C. चाँद बीबी
D. गुलबदन बेगम

✅B. रजिया
  • रजिया ने पर्दे के पीछे से शासन करने के बजाय सार्वजनिक रूप से राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व करने का प्रयास किया।
  • उसका शासनकाल लगभग 1236–1240 ई. तक रहा।
  • तुर्क अमीर उसके स्वतंत्र निर्णयों से असंतुष्ट थे। अंततः राजनीतिक विरोध के कारण उसका शासन समाप्त हो गया।

बलबन की राजसत्ता संबंधी नीति का प्रमुख उद्देश्य क्या था?

A. सुल्तान की प्रतिष्ठा और केंद्रीय सत्ता को मजबूत करना
B. व्यापारियों को राजनीतिक अधिकार देना
C. ग्रामीण स्वशासन समाप्त करना
D. विदेशी व्यापार को बढ़ावा देना

✅A. सुल्तान की प्रतिष्ठा और केंद्रीय सत्ता को मजबूत करना
  • बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा को अत्यंत ऊँचा स्थान दिया।
  • उसने दरबार में कठोर अनुशासन और औपचारिकता पर जोर दिया।
  • वह 1266 में दिल्ली का शासक बना और 1287 तक शासन किया।

बलबन के शासन में ‘सिजदा’ और ‘पायबोस’ किससे संबंधित थे?

A. सैन्य प्रशिक्षण
B. दरबारी शिष्टाचार
C. भूमि मापन
D. कर संग्रह

✅B. दरबारी शिष्टाचार
  • सिजदा में सुल्तान के सामने झुककर सम्मान प्रकट किया जाता था।
  • पायबोस में सुल्तान के चरणों को चूमने की प्रथा से सम्मान व्यक्त किया जाता था।
  • इन प्रथाओं का उद्देश्य सुल्तान को सामान्य अमीरों से अलग और अत्यधिक प्रतिष्ठित दिखाना था।

मध्यकालीन भारत में ‘इक्ता’ मुख्यतः किससे संबंधित थी?

A. धार्मिक शिक्षा
B. समुद्री व्यापार 
C. राजस्व प्राप्ति और प्रशासनिक व्यवस्था
D. शिल्पकारों के संगठन

✅C. राजस्व प्राप्ति और प्रशासनिक व्यवस्था
  • इक्ता सल्तनत काल की महत्वपूर्ण प्रशासनिक-राजस्व व्यवस्था थी।
  • इसके अंतर्गत किसी अधिकारी को निर्धारित क्षेत्र से कर एकत्र करने अधिकार दिया जाता था।
  • ऐसे अधिकारी को सामान्यतः इक्तादार या मुक्ति कहा जाता था।
  • इक्ता प्रणाली की शुरुआत 'इल्तुतमिश' ने की थी।

दिल्ली सल्तनत के प्रशासन में ‘दीवान-ए-अर्ज’ किस विभाग से संबंधित था?

A. न्याय
B. सैन्य व्यवस्था
C. विदेश नीति
D. धार्मिक मामलों

✅B. सैन्य व्यवस्था
  • दीवान-ए-अर्ज सल्तनत के सैन्य विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यालय था।
  • इसका प्रमुख अधिकारी सैनिकों की भर्ती, सैन्य व्यवस्था और सेना से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करता था।

बलबन की ‘रक्त और लौह’ नीति मुख्यतः किस उद्देश्य से जुड़ी थी?

A. कृषि उत्पादन बढ़ाना
B. विद्रोहों और अव्यवस्था को कठोरता से दबाना
C. समुद्री व्यापार बढ़ाना
D. धार्मिक संस्थाओं का विस्तार करना

✅B. विद्रोहों और अव्यवस्था को कठोरता से दबाना
  • बलबन ने केंद्रीय सत्ता के विरुद्ध विद्रोहों को गंभीर खतरे के रूप में देखा।
  • उसने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कठोर सैन्य कार्रवाई की। दोआब और आसपास के क्षेत्रों में डकैतों तथा विद्रोही तत्वों के विरुद्ध अभियान चलाए गए।
  • इसी कठोर दृष्टिकोण को इतिहास में उसकी ‘लौह और रक्त’ नीति के रूप में वर्णित किया जाता है।

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